देश की प्रगति के लिए जरूरी हैं विदेशी निवेशक, बातचीत से बनेगा सकारात्मक माहौल : सेबी प्रमुख

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) प्रमुख के तौर पर 1 मार्च से कार्यभार संभालने वाले तुहिन कांत पांडे एक्शन में दिख रहे हैं। एक कार्यक्राम में उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों के भारतीय बाजार में कामकाज से संबंधित नियमों को आसान बनाने पर काम करेंगे।

एफपीआई पर क्या बोले तुहिन कांत पांडे?

सेबी चीफ ने एक कार्यक्राम में विदेशी निवेशकों के मुद्दे पर बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि बोर्ड विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार से संबंधित कठिनाइयों को दूर करने और उनके काम को आसान बनाने से जुड़े नियमों को और तर्कसंगत बनाने के लिए बातचीत को तैयार है।

उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि विदेशी पूँजी को आकर्षित करने के लिए देश में अनुकूल माहौल होना चाहिए। देश में ऐसा माहौल है भी। अगर एफपीआई और एआईएफ को परेशानी हो रही है तो उन कठिनाइयों को दूर करने और नियमों को और तर्कसंगत बनाने कि दिशा में बातचीत की जा सकती है। ऐसा करके उन्हें खुशी ही होगी।

सेबी चीफ को क्यों करनी पड़ी बात?

सेबी के नये अध्यक्ष की बातों के पीछे का कारण ये है कि विदेशी निवेशक पिछले साल सितंबर से भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आँकड़ों के मुताबिक इस साल सिर्फ फरवरी में ही विदेशी निवेशकों ने 34,574 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। पिछले 5 महीनों से अब तक की बात करें तो विदेशी निवेशक 37 अरब डॉलर से ज्यादा कि बिकवाली कर चुके हैं।

घरेलू संस्थागत निवेशकों ने संभाल रखी है कमान

अपने भाषण में सेबी चीफ ने कहा कि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने बाजार को स्थिर बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विदेशी निवेशक जब भी बिकवाली करते हैं तो घरेलू निवेशक तुरंत गिरावट को रोकने के लिए आ जाते हैं। हालाँकि ये बात भी हमें नहीं भूलनी चाहिए कि विदेशी निवेशक भी भारतीय शेयर बाजार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

दो गुना जारी हुई इक्विटी

सेबी चीफ ने बताया कि मौजूदा वित्त वर्ष में अब तक 4 लाख करोड़ रुपये की इक्विटी जारी हुई है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में इसकी आधी इक्विटी ही जारी हुई थी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बाजार के विस्तार के लिए कुछ नया भी किया जाना चाहिए जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सके।

भारत का नहीं कोई सानी

तुहिन कांत पांडे ने कहा कि जितनी तेजी से भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है उतनी तेजी से दुनिया का कोई और देश विकास नहीं कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक फंड (आईएमएफ) का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया के दूसरे विकासशील बाजारों के 2025 में 4.2% की दर से बढ़ने की उम्मीद है, जबकि भारत का विकास अनुमान 6-6.5% है। उन्होंने ये भी उम्मीद जतायी की भारत और भी ज्यादा तेजी से विकास करने का सामर्थ्य रखता है और उसे हासिल भी कर सकता है।

(शेयर मंथन, 10 मार्च 2025)

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