सीएलएसए का भारत के लिए बदला रुख, मंदी के बदले अपनाया रचनात्मक नजरिया
सीएलएसए इक्विटी स्ट्रैटेजी (सीएलएसए Equity Strategy) के विकास जैन ने 18 महीने तक भारतीय शेयरों पर मंदी का रुख बनाये रखने के बाद अब रचनात्मक (constructive) नजरिया अपना लिया है।
सीएलएसए इक्विटी स्ट्रैटेजी (सीएलएसए Equity Strategy) के विकास जैन ने 18 महीने तक भारतीय शेयरों पर मंदी का रुख बनाये रखने के बाद अब रचनात्मक (constructive) नजरिया अपना लिया है।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (ceasefire) होने के साथ ही भारत का शेयर बाजार बीते सप्ताह जोरदार ढंग से उछला। इस सप्ताह में सेंसेक्स और निफ्टी ने लगभग 6% की छलाँग लगायी, जो बीते कई वर्षों में सबसे जबरदस्त साप्ताहिक बढ़त है।
एक निवेशक जानना चाहते हैं कि उन्हें इरेडा (IREDA) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?
अभिषेक कोठारी जानना चाहते हैं कि उन्हें अंबुजा सीमेंट (Ambuja Cement) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?
पिछले दो वर्षों में बाजार की चाल को लेकर निवेशकों के मन में एक बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या यह सिर्फ ठहराव (कंसोलिडेशन) है या फिर कमजोरी का संकेत।
आईटी सेक्टर में पिछले कुछ समय से जिस “बॉटमिंग आउट” की प्रक्रिया के संकेत मिल रहे थे, वह अब और स्पष्ट होती दिख रही है।
पिछले छह–सात हफ्तों से जिस अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव का बाजार पर दबाव बना हुआ था, उसमें अचानक एक सकारात्मक मोड़ देखने को मिला जब वैश्विक स्तर पर नरमी के संकेत आए।
हालिया बाजार परिस्थितियों में 23,700 से 24,000 के दायरे को एक महत्वपूर्ण रेंज के रूप में देखा जा रहा है, जहां निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में रणनीतिक बदलाव करने की जरूरत हो सकती है।
पूरी दुनिया के बाजारों को जिस बात की प्रतीक्षा थी, वह हो चुकी है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (ceasefire) की घोषणा हो गयी है। तो क्या अब भारत का शेयर बाजार वापस ऊपर की चाल पकड़ सकेगा? बुधवार की जोरदार उछाल के बाद गुरुवार को मुनाफावसूली क्यों उभर आयी?
वैश्विक बाजारों की चाल को समझने में अक्सर यह देखा जाता है कि चार्ट पहले संकेत दे देते हैं, जबकि असली कारण बाद में सामने आते हैं।
बैंक निफ्टी के हालिया मूवमेंट पर नजर डालें तो पिछले सप्ताह बाजार का व्यवहार काफी हद तक अनिश्चित और सीमित दायरे में घूमता हुआ नजर आया।
मिड कैप और स्मॉल कैप शेयरों में इस समय निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती किसी स्पष्ट ट्रेंड की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि उस ट्रेंड के पीछे के कारणों की गहरी अनिश्चितता है।
वैश्विक राजनीति और आर्थिक परिदृश्य इस समय एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर खड़ा है, जहां युद्ध, कूटनीति और बाजार- तीनों एक-दूसरे को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं।
वैश्विक बाजारों का रुख इस समय पूरी तरह अनिश्चितता और सट्टेबाज़ी के मिश्रण से संचालित होता दिख रहा है।
स्मॉल कैप और मिड कैप शेयरों में इस समय सबसे बड़ी समस्या किसी स्पष्ट ट्रेंड की कमी नहीं, बल्कि उस ट्रेंड के पीछे के कारणों की अनिश्चितता है।
मौजूदा समय में निफ्टी लगभग 22,700 के आसपास बंद हो रहा है, लेकिन चार्ट को ध्यान से देखें तो अभी भी बाजार में कमजोरी का ट्रेंड पूरी तरह खत्म होता हुआ नजर नहीं आता।