यस बैंक शेयरों में 20 रुपये पर फंसे, अब क्या करें निवेशक?
राजू कुमार प्रसाद जानना चाहते हैं कि उन्हें यस बैंक (YES Bank) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?
राजू कुमार प्रसाद जानना चाहते हैं कि उन्हें यस बैंक (YES Bank) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?
ईएमएस (इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज) सेक्टर को लेकर निवेशकों के मन में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या इसमें आई तेजी के बाद अब वैल्यूएशन सही स्तर पर आ चुके हैं।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (ऑयल) की कीमतों को लेकर भविष्यवाणी करना आज के समय में लगभग असंभव हो गया है, क्योंकि इसमें भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन की बाधाएं और वैश्विक मांग जैसे कई अनिश्चित कारक शामिल हैं।
आईटी सेक्टर को लेकर इस समय बाजार में जो सबसे बड़ा डर है, वह केवल वैश्विक नीतियों या वीजा नियमों से जुड़ा नहीं है।
शेयर बाजार में निवेश करते समय सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि आखिर किस शेयर को चुना जाए। लेकिन किसी एक व्यक्ति या विशेषज्ञ से सीधे “नाम” लेने के बजाय यह समझना ज्यादा जरूरी है कि सही शेयर तक पहुंचा कैसे जाए।
आरबीआई की नीतियों को लेकर बाजार में जो चिंता उभर रही है, उसका मूल कारण बढ़ती महँगाई और रुपये पर दबाव है।
सीएलएसए इक्विटी स्ट्रैटेजी (सीएलएसए Equity Strategy) के विकास जैन ने 18 महीने तक भारतीय शेयरों पर मंदी का रुख बनाये रखने के बाद अब रचनात्मक (constructive) नजरिया अपना लिया है।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (ceasefire) होने के साथ ही भारत का शेयर बाजार बीते सप्ताह जोरदार ढंग से उछला। इस सप्ताह में सेंसेक्स और निफ्टी ने लगभग 6% की छलाँग लगायी, जो बीते कई वर्षों में सबसे जबरदस्त साप्ताहिक बढ़त है। निफ्टी का 24,000 के ऊपर बंद होना भी काफी अहम है।
एक निवेशक जानना चाहते हैं कि उन्हें इरेडा (IREDA) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?
अभिषेक कोठारी जानना चाहते हैं कि उन्हें अंबुजा सीमेंट (Ambuja Cement) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?
पिछले दो वर्षों में बाजार की चाल को लेकर निवेशकों के मन में एक बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या यह सिर्फ ठहराव (कंसोलिडेशन) है या फिर कमजोरी का संकेत।
आईटी सेक्टर में पिछले कुछ समय से जिस “बॉटमिंग आउट” की प्रक्रिया के संकेत मिल रहे थे, वह अब और स्पष्ट होती दिख रही है।
पिछले छह–सात हफ्तों से जिस अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव का बाजार पर दबाव बना हुआ था, उसमें अचानक एक सकारात्मक मोड़ देखने को मिला जब वैश्विक स्तर पर नरमी के संकेत आए।
हालिया बाजार परिस्थितियों में 23,700 से 24,000 के दायरे को एक महत्वपूर्ण रेंज के रूप में देखा जा रहा है, जहां निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में रणनीतिक बदलाव करने की जरूरत हो सकती है।
पूरी दुनिया के बाजारों को जिस बात की प्रतीक्षा थी, वह हो चुकी है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (ceasefire) की घोषणा हो गयी है। तो क्या अब भारत का शेयर बाजार वापस ऊपर की चाल पकड़ सकेगा? बुधवार की जोरदार उछाल के बाद गुरुवार को मुनाफावसूली क्यों उभर आयी?
वैश्विक बाजारों की चाल को समझने में अक्सर यह देखा जाता है कि चार्ट पहले संकेत दे देते हैं, जबकि असली कारण बाद में सामने आते हैं।