
नया वित्त वर्ष 2025-26 सरकार के लिए अच्छा साबित हुआ है। आँकड़े बताते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था ने पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया जिसका असर जीएसटी संग्रह पर दिख रहा है। इस अवधिक में सरकार का जीएसटी संग्रह 10% बढ़ा है।
कितना रहा जीएसटी संग्रह?
इस बार जिएसटी संग्रह 1.96 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। आँकड़े बताते हैं कि केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) संग्रह 38,100 करोड़ रुपये, स्टेट जीएसटी (एसजीएसटी) 49,900 करोड़ रुपये, और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) संग्रह 95,900 करोड़ रुपये रहा। इसी के साथ कुल जीएसटी राजस्व 12,300 करोड़ रुपये हो गया।
जीएसटी संग्रह पर क्या कहते हैं जानकार?
जानकारों का कहना है कि जिस तरह जीएसटी संग्रह बढ़ा है उसे देखकर कह सकते हैं कि कंपनियों और फर्मों ने समय पर और नियम से टैक्स भरा है। वहीं ये उम्मीद भी जगती है कि अगली तिमाही में इसमें और बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
मार्च में कितना हुआ था संग्रह?
सरकार के आँकड़ों के मुताबिक मार्च 2025 में कुल जीएसटी संग्रह 1.76 लाख करोड़ रुपये था। उस समय भी ये फरवरी 2025 के मुकाबले 7.3% ज्यादा था। पूरे वित्त वर्ष 2025 में कुल जीएसटी संग्रह 22.08 लाख करोड़ रुपये था। ये भी वित्त वर्ष 2023-24 के मुकाबले 9.4% ज्यादा था। लेकिन वापसी समायोजन के बाद वित्त वर्ष 2024-25 के लिए शुद्ध जीएसटी संग्रह 8.6% की बढ़त के साथ 19.56 लाख करोड़ रुपये हो गया था। वहीं, फरवरी में ये 9.1% बढ़ा था और जनवरी में 12.3% की दर से इसमें बढ़ोतरी देखने को मिली थी। इस तरह हर महीने की बढ़त बताती है कि सरकार की झोली हर महीने जीएसटी संग्रह से लगातार भर भी रही है और बढ़ भी रही है।
(शेयर मंथन, 03 अप्रैल 2025)
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