
दुनिया को जिस घोषणा का शिद्दत से इंतजार था, वो आखिर हो गयी और अमेरिकी राष्टपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने व्यापारिक साझेदारों या यूँ कहें कि दुनिया पर पारस्परिक शुल्क (रेसिप्रोकल टैरिफ) का चाबुक चलाने की आधिकारिक घोषणा करते हुए इसे अपने देश के लिए मुक्ति दिवस बताया। हालाँकि, ट्रंप के इस कदम से दुनिया पर मंडरा रहा व्यापार युद्ध का खतरा गहरा गया है।
ट्रंप ने व्हाइट हाउस के रोज गार्डेन से भारत, चीन समेत अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर भारी आयात शुल्क लगाने का ऐलान करते हुए कहा, ‘जितना कर वे हम पर लगाते हैं, हम भी लगायेंगे, लेकिन थोड़ा कम’। साथ ही उन्होंने कहा कि 2 अप्रैल के ऐतिहासिक दिन को अमेरिकावासी मुक्ति दिवस (लिबरेशन डे) के रूप में याद करेंगे।
भारत को दी छूट
अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत को आयात शुल्क में एशिया के अन्य समकक्ष देशों के मुकाबले रियायत देते हुए कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके संबंधों को देखते हुए ये फैसला लेना बहुत कठिन था। उन्होंने भारत पर 26%, चीन पर 34%, जापान पर 24%, वियतनाम पर 46%, दक्षिण कोरिया पर 25%, ऑस्ट्रेलिया पर 10%, यूरोपीय संघ पर 20% और यूनाइटेड किंगडम पर 10% आयात शुल्क लगाने को मंजूरी दी। ये अतिरिक्त शुल्क 9 अप्रैल से अमेरिका में आयात होने वाले विदेशी सामानों और सेवाओं पर लागू होगा। अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा 46 अरब डॉलर है।
10% का बेस टैरिफ अलग से लागू
ट्रंप ने भारत समेत दुनिया के 60 देशों पर आयात शुल्क का चाबुक चलाते हुए 10% बेस टैरिफ अलग से लागू करने की भी घोषणा की। ये टैरिफ 5 अप्रैल को रात 12 बजे से लागू होंगे।
इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद और रत्न-आभूषण क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित
भारत से अमेरिका को लगभग 14 अरब डॉलर मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद और 9 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के रत्न एवं आभूषण का निर्यात करता है। भारत पर लागे टैरिफ से ये क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। हालाँकि, ट्रंप प्रशासन ने भारत से आयातित फार्मास्यूटिकल उत्पाद को रेसिप्रोकल टैरिफ से छूट दी है, जो भारत के फार्मा उद्योग के लिए राहत की खबर है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 9 अरब डॉलर मूल्य की दवाओं की बिक्री की थी। भारत के कुल फार्मा निर्यात में अमेरिका का लगभग एक तिहाई योगदान रहता है।
भारत की तैयारी
जानकारों का मानना है कि 26% शुल्क से भारत ज्यादातर अप्रभावित रहेगा, क्योंकि अमेरिका के साथ भारत की जीडीपी के मुकाबले निर्यात अनुपात महज 2.2% है। अत: यह असर व्यापक न होकर कुछ विशेष क्षेत्रों तक सीमित रह सकता है। इसके बावजूद भारत की रणनीति नये निर्यात बाजार तलाशने अर्थात निर्यात विविधिकरण (export diversification) की हो सकती है। इसके अलावा वह मूल्य-वर्धित उत्पाद तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। भारत अमेरिका के साथ व्यापार समझौते का मसौदा भी तैयार कर रहा है, जिससे राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है।
बाजारों में हाहाकार
अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा टैरिफ की घोषणा के बाद एशियाई बाजार लाल हो गये। जापान के निक्केई में एक समय जहाँ 4% से ज्यादा की गिरावट थी, वहीं दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.5% टूट गया। हॉन्गकॉन्ग के हैंग सेंग में 1.5% की गिरावट रही, तो शंघाई कंपोजिट भी लाल निशान में रहा। ऑस्ट्रेलिया के एसऐंडपी/एएसएक्स में शुरुआती कारोबार में लगभग 2% की देखने को मिली थी।
(शेयर मंथन, 03 अप्रैल 2025)
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