
प्रॉपर्टी खरीदना बहुत संवेदनशील और कठिन प्रक्रिया है, जिसमें कानूनी नियमों का पालन करना जरूरी होता है। देश में रोजाना हजारों करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी की खरीद और बिक्री होती है। प्रॉपर्टी खरीदने के इच्छुक लोग सीधे मालिक या फिर डीलर के जरिये प्रॉपर्टी को चुनने के बाद खरीद-बिक्री की प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ते हैं। इसको लेकर सरकार ने कई तरह के नियम और कानून बनाये हैं, जिनको समझना जरूरी होता है।
प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के वक्त गवाह भी बनाये जाते हैं। लेकिन, यहाँ जानना जरूरी है कि हर कोई ऐसे मामलों में गवाह नहीं बन सकता है। इसके लिए भी नियम-कानून तय किये गये हैं। प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री एक कानूनी प्रक्रिया है जिसमें दो गवाहों की उपस्थिति अनिवार्य है। ये गवाह न केवल विक्रेता और खरीदार की पहचान सत्यापित करते हैं, बल्कि पूरी लेनदेन प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करते हैं। ऐसे में गवाह का किरदार भी अहम हो जाता है।
कौन लोग नहीं बनाये जा सकते हैं गवाह
- प्रॉपर्टी डील में ऐसे व्यक्ति को गवाह बनाया जाता है, जिसे डील के बारे में पूरी जानकारी हो।
- साथ ही डील की शर्तों आदि को समझते हों और उन्हें पता हो कि प्रॉपर्टी किस भाव पर खरीदी या बेची जा रही है।
- दूसरी खास बात यह है कि गवाह को इस मामले में अच्छे से पता होना चाहिये कि वह प्रॉपर्टी डील के मामले में गवाह बनने जा रहे हैं।
- प्रॉपर्टी को बेचने वाले व्यक्ति और खरीदने वाले गवाह नहीं बनाये जा सकते हैं।
- जिनकी उम्र 18 साल से कम हो, ऐसे लोग प्रॉपर्टी के खरीद-बिक्री मामलों में गवाह नहीं बन सकते हैं।
- साथ ही ऐसे लोगों को भी गवाह नहीं बनाया जा सकता है जिनकी मानसिक स्थिति ठीक न हो।
भारत में किसी भी प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 के तहत पूरी की जाती है। ये कानून प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेजों के रजिस्ट्रेशन, सबूतों के संरक्षण और स्वामित्व के आश्वासन को सुनिश्चित करने का प्रावधान करता है।
(शेयर मंथन, 03 अप्रैल 2025)
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