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भारतीय निर्यातकों के साथ अमेरिकी उपभोक्ताओं पर बोझ से कम नहीं रेसिप्रोकल टैरिफ : जीजेईपीसी

भारत के रत्न एवं आभूषण उद्योग ने अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर पारस्परिक टैरिफ को भारतीय निर्यातकों के साथ ही अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए भी बोझ बताया है। भारत के जेम ऐंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) ने वक्तव्य जारी कर ट्रंप प्रशासन से दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी की भावना को कायम रखने की अपील की। 

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल का पारस्परिक शुल्क लगाने की जो घोषणा की है उससे भारत के रत्न एवं आभूषण कारोबार पर व्यापक असर देखने को मिलेगा। हालाँकि, दुनिया के अन्य देशों की तरह भारतीय रत्न एवं आभूषण उद्योग भी अमेरिका द्वारा दुनियाभर के देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने के कारण उभरते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का विश्लेषण करने का प्रयास कर रहा है।  

जेम ऐंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) अमेरिकी प्रशासन की पारस्परिक टैरिफ के जरिये व्यापार और शुल्क की विसंगतियों को दूर करने की मंशा को समझती है, लेकिन वह अमेरिका से अनुरोध करती है कि भारत और अमेरिका के बीच लंबी अवधि की व्यापारिक साझेदारी की भावना को कायम रखे, जो आपसी सम्मान और साझे आर्थिक हितों पर आधारित है।   

ट्रंप प्रशासन द्वारा अमेरिका को भारतीय रत्न एवं आभूषण निर्यात पर 26% पारस्परिक टैरिफ की घोषणा, भारतीय निर्यातकों और अमेरिकी उपभोक्ताओं दोनों पर बहुत बड़ा बोझ होगी। जहाँ, प्रतिस्पर्धी देशों पर टैरिफ लागू होना चुनौती और अवसर दोनों है, वहीं इससे भारत के हीरा एवं आभूषण क्षेत्र पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है, जो अमेरिका को इसके निर्यात का आधार है। 

लंबी अवधि में हमें वैश्विक आपूर्ति श्रंखला में बदलाव आने का अनुमान है। लेकिन अल्प अधवि में हमें अमेरिकी बाजार में भारत के 10 अरब डॉलर के निर्यात को कायम रखने में चुनौतियों की आशंका है। हम भारत सरकार से भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समर्झाते में आगे बढ़ने का आग्रह करते हैं, क्योंकि ये टैरिफ के मसलों को सुलझाने और क्षेत्र के दीर्घावधि हित सुरक्षित रखने में अहम होगा। 

इसके अलावा जीजेईपीसी इन जोखिमों से निपटने के लिए सक्रिय तौर से साझेदारों के साथ बातचीत कर रहा है और संतुलित समाधान की वकालत कर रही है, ताकि अमेरिका तक निरंतर पहुँच सुनिश्चित हो सके। 

(शेयर मंथन, 04 अप्रैल 2025)

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